आतंक के खिलाफ सबसे बड़े ऑपरेशन की तैयारी, घाटी में पहुंचे एनएसजी कमांडो



श्रीनगर। कश्मीर घाटी में आतंकरोधी अभियानों में आवश्यकता अनुरूप सक्रिय भूमिका निभाने के लिए एनएसजी का एक दस्ता घाटी पहुंच चुका है। यह दस्ता बीते एक पखवाड़े से श्रीनगर एयरपोर्ट के पास सीमा सुरक्षाबल के एक प्रशिक्षण केंद्र में पुलिस, सीआरपीएफ और बीएसएफ से चुने गए जवानों के साथ आतंकरोधी अभियानों के अभ्यास में जुटा है।
एनएसजी को जम्मू कश्मीर में आतंकरोधी अभियानों के लिए तैनात करने की योजना गत वर्ष बनी थी और इस प्रस्ताव पर औपचारिक मुहर लगाई है। अधिकारियों ने बताया कि एनएसजी कमांडो का दस्ता पूरी तरह जम्मू कश्मीर पुलिस के अधीन रहेगा, क्योंकि आतंकरोधी अभियानों के संचालन की नोडल संस्था राज्य पुलिस ही है। 
एनएसजी के कमांडो 1990 के दशक में भी आतंकरोधी अभियानों के लिए आ चुके है। लेकिन एनएसजी को राज्य में आतंकरोधी अभियानों के लिए स्थायी तौर पर पहली बार तैनात किया जा रहा है। श्रीनगर में आए एनएसजी कमांडो अत्याधुनिक हैकलर, कोच एमपी-5 सब मशीनगन, स्नाइपर राइफलों और दिवार के आरपार देखने वाले राडार और सी-4 विस्फोट से लैस हैं।
एनएसजी का गठन 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद हुआ था। गुजरात के अक्षरधाम मंदिर पर हुए आतंकी हमले के अलावा मुंबई हमलों और पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमले के समय भी एनएसजी कमांडो की सेवाएं ली गई थीं। मौजूदा समय में एनएसजी में 7500 अधिकारी और जवान हैं। 
संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर को लेकर पाकिस्तान एक बार फिर अलग-थलग पड़ गया है। मानवाधिकार उच्चायुक्त जेड राद अल हुसैन की कश्मीर रिपोर्ट को छह देशों ने खारिज कर दिया है। इन देशों में भूटान, अफगानिस्तान, मॉरीशस, बेलारूस, क्यूबा और वेनेजुएला शामिल हैं। 
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उन्होंने रिपोर्ट देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकार की स्थिति बहुत गंभीर है। राज्य में मानवाधिकार उल्लंघन की जांच करने के लिए आयोग गठित करने की भी मांग की। लेकिन, एक भी देश ने न तो पाकिस्तान और न ही कश्मीर रिपोर्ट का समर्थन किया। उलटे कई देशों ने रिपोर्ट पेश करने के समय और इसके तथ्यों पर सवाल खड़े किए।
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via http://www.sanjeevnitoday.com/

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